
मंत्री ओमप्रकाश राजभर के जिला पंचायत विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों का मऊ की जनता को नहीं है जानकारी
अधिकतम कार्यों का नहीं लगाया जाता है निर्माण संबंधी बोर्ड।
पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बड़े बेटे अरविंद राजभर घोसी लोकसभा से एनडीए के रहे है प्रत्याशी।
लेकिन चुनाव के दौरान मऊ के विकास को लेकर किए गए वादे भूले।
जिला पंचायती विभाग अंतर्गत मऊ में कराए गए विकास कार्यों का भी नहीं है इनके पास कोई लेखा जोखा
फास्ट इंडिया न्यूज ब्यूरो
मऊ। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में जिला पंचायत विभाग द्वारा करोड़ों रुपए के बजट का काम प्रत्येक वर्ष कागजों पर स्वीकृत हो रहा है।लेकिन जिला पंचायत द्वारा कहा कहा कार्य कराया गया या यूं कहे कि कराया जा रहा है इसकी कोई चर्चा जिले में नहीं हो रही है।
वहीं अभिषेक और राहुल का कहना है कि जिला पंचायत विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपए का बजट से सड़क,नाली पिच आदि कराए जाने हेतु टेंडर होता है।लेकिन अधिकतम काम धरातल पर नजर नहीं आता है।प्रश्न उठता है कि आखिरकार फिर करोड़ों रुपए के टेंडर का बजट कहा जाता है?
आपको जानकर हैरानी होगी कि पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बड़े पुत्र अरविंद राजभर घोसी लोकसभा से एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ चुके है।लेकिन यह भी मऊ जनपद में पंचायती राज विभाग द्वारा कहा कहा विकास कार्य किया जा रहा है इसका लेखा जोखा इनके पास नहीं है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर का मऊ सहित पूर्वांचल की राजनीति में अहम भूमिका है।इसके बावजूद मऊ जिले में पंचायती राज विभाग के विकास कार्यों पर कोई नजर नहीं है।
जिला पंचायत द्वारा जिले के किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में कच्चा या पक्का काम कराया जा सकता है।लेकिन आम जनता को यह भी नहीं पता चल पाता है कि ग्रामीणों क्षेत्रों में बड़े बड़े सड़क,नाली पिच आदि का काम जिला पंचायत द्वारा कराया जा सकता है।बहुत सारे काम कराने का टेंडर होता भी है लेकिन ग्रामीण व्यक्तियों को पता भी नहीं चलता है कि जिला पंचायत द्वारा कौन सा कार्य किया गया है।
कैसे होता है खेल
मंत्री ओम प्रकाश राजभर के पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायत हो, क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत हो यह तीनों पंचायत के अंतर्गत हो रहे निर्माण कार्य कितने लागत से किया जा रहा है और किस विभाग द्वारा किया जा रहा है। इसका बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है। लेकिन जिला पंचायत द्वारा करोड़ों रुपए का कार्य कराए जाने हेतु टेंडर प्रत्येक वर्ष होता है और भुगतान भी होता है लेकिन कितने लागत से कौन सा कार्य जिला पंचायत द्वारा किया गया है इसका निर्माण कार्य संबंधी बोर्ड अधिकतम जगह आपको नहीं दिखाई देगा या यूं कह लीजिए कि कुछ जगह बिना कार्य कराए ही भुगतान हो जाता है। और यही से बड़ा खेल होना शुरू होता है।शेष अगले अंक में....



